Tesu Flower Powder

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Tesu Flower (Dhak, Palash) (टेसु के फूल)

  1. भरतीय इतिहास में पलाश का पेड़ प्रमुख स्थान रखता है। इसे पलाश, ढाक, पलाह, जंगल की लो आदि नामो से जानते है। इसका ओरयोग स्किन, आँखो, मधुमेह आदि बीमारियों में किया जाता है। इन फूलो में फलेवोनायदस, ट्राइटरपेन (triterpene),  आइसोबुट्रिन (isobutrin), आइसोकोरोप्सिन (isocoreopsin), सल्फरिन (sulphurein) आदि तत्व पाए जाते है।
  2. किसी भी तरह की पेट की समस्याओं जैसे की आंतरिक गाँवों, अल्सर की परेशानी में पलाश के फूलो का उपयोग किया जाता है। यह पेट और आँट से सम्बंधित सभी प्रकार की समस्याओं को दूर करने में मद्द करता है। पेट की समस्याओं को दूर करने के लिए 2-3g पलाश फूल के पाउडर का उपयोग करते है।
  3. बार-बार बुखार होने पर पलाश के फूलो को पीसकर इसका रस निकाले। इस रस को चीनी और दूध के मिश्रण में मिलाकर सेवन करे।
  4. शरीर के अतिरिक्त गरमी की समस्या से छुटकारा पाने के लिए 3-4 चम्मच टेसु ओर चीनी के मिश्रण का सेवन करे।
  5. सूजन को दूर करने के लिए पलाश के फूल बहुत हाई प्रभावशाली होते है। पानी की भाप में या हल्की आँच में पलाश के फूलो को गरम करे और सूति कपड़े की शायत से इन गर्म फूलो को प्रभावित क्षेत्र में बांधे। ऐसे करने से आप गठिया, चोट, मस्तिष्क आदि की सूजन और दर्द को कम कर सकते है।
  6. सूखे हुए पलाश के एक फूल को 1 कप पानी में रात भर भीगने दे और सुभे इस पानी का सेवन करे। इस तरह पाँचवे दिन तक फूलो की संख्या बढ़ते रहे और फिर इसी तरह इन फूलो की संख्या को घटाते हुए इस पानी का सेवन करे। ऐसा लगातार 2-2.5 माह तक करे। आपके शरीर में शुगर का लेवल कम हो जयेगा।
  7. पुरशो में नपुंसकता (impotency) की बीमारी को दूर करने के लिए पलाश फूलो का उपयोग किया जाता है। पलाश के फूलो के पाउडर में चीनी मिलाए और एक गिलास दूध में लगभग इस मिश्रण की 3g मात्रा मिलाकर सुभे और इसका सेवन करे।
  8. आयुर्वेद की माने तो होली के लिए रंग बनाने के अलावा इसके फूलो को पीस कर चेहरे पर लगाने से चमक बढ़ती है। यह इन्फ़ेक्शन को भी दूर करता है। इसके उपयोग से बुढ़ापा भी दूर रहता है।
  9. पलाश के फूल के पानी से स्नान करने से लू नहि लगती तथा गर्मी का एहसास नहि होता।
  10. पलाश के फूल का पेस्ट बनाकर चिकन-पौकस के रोगियों को लगाया जाता है। टेसु का फूल अहसाय चर्म रोगों में भी लाभदायक होता है।
  11. टेसु का फूल कफ, वाट, उदर रोग, क्रमि, कुषठ, गुलम, प्रेमह, बवासीर, खाँसी, पसीने को दूर करने वाला है।
  12. गरमी लगने पर पलाश के फूल का काढ़ा बनाकर, मिश्री डालकर पीने से गरमी भाग जाती है।
  13. पलाश के 5-7 फूलो को रात भर ठंडे पानी में भिगोए और सुभे के समय में इस पानी से निकाल दे और पानी को छानकर उसमें थोड़ी सी मिश्री मिलाकर पी ले। इससे नकसीर में लाभ मिलता है।
  14. गर्भवस्था और स्तनपान के समय पलाश के फूलो का प्रयोग करे।
  15. लम्बे समय तक सेवन करने से एनेमिया और किड्नी से सम्बंधित समस्याएँ हो सकती है।